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शीतला सप्तमी


सप्तमी को बासोड़ा के नाम से भी जानते है। शीतला सप्तमी का पर्व 21 मार्च 2025 शुक्रवार को मनाया जाएगा यानि कृष्ण पक्ष के सप्तमी तिथि को मनाया जाएगा। शीतला सप्तमी की तिथि 21 मार्च यानी कल सुबह 2 बजकर 45 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 22 मार्च को सुबह 4 बजकर 23 मिनट पर होगा. 


शीतला सप्तमी का पूजा मुख्य रूप से गुजरात ,राजस्थान ,उत्तरप्रदेश में मनाया जाता है। यह पर्व शीतला देवी को समर्पित है जिन्हे खसरा और चेचक जैसी बीमारियों की देवी कहा जाता है। शीतला सप्तमी के व्रत पालन से सभी शारीरिक बाधाओं से मुक्ति मिलती है।


हिंदू मान्यताओं के अनुसार, माता शीतला को संक्रामक रोगों और बीमारियों से सुरक्षा देने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। खासकर गर्मी के मौसम में माता शीतला की पूजा से शरीर की स्वच्छता और पर्यावरण की रक्षा की जाती है, जो आज भी हमारे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्कंद पुराण में माता शीतला का वाहन गर्दभ है। वे अपने हाथों में कलश, सूप, मार्जन (झाडू) तथा नीम के पत्ते धारण करती हैं। शीतला माता बीमारियों से बचने का सन्देश देती है। जो चेचक का रोगी की परेशानी को हर देते हैं।माता शीतला की पूजा का उद्देश्य शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार लाना है और हमें अपनी दैनिक जीवनशैली में स्वच्छता और सादगी को अपनाना चाहिए, ताकि शारीरिक और मानसिक रूप से हम स्वस्थ और सुखी रहें। शीतला देवी की पूजा का एक गहरा सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है, जो न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को, बल्कि मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य को भी बढ़ावा देती है

 
 
 

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Jyotishacharya Sharwan Kumar Jha

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